श्री शनि चालीसा | शनिदेव की चालीसा
चालीसाशनिदेव

श्री शनि चालीसा

✍️ Akhand Bhakti Sagar
श्री शनि चालीसा का पाठ करें और शनिदेव की आराधना करें। शनिवार को शनिदेव की पूजा और शनि चालीसा पाठ की प्रचलित धार्मिक परंपरा के बारे में जानें।
📿 गीत / बोल
॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
॥ चौपाई ॥
जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु विनय महाराज।
करहु कृपा हे सूर्यसुत, रखहु भक्तन की लाज॥
जयति जयति शनिदेव दयाला।
करत सदा भक्तन प्रतिपाला॥
चारि भुजा तनु श्याम विराजे।
माथे रतन मुकुट छवि साजे॥
परम विशाल मनोहर भाला।
टेढ़ी दृष्टि भृकुटि विकराला॥
कुण्डल श्रवण चमकते प्यारे।
शोभित मुख पर केश सँवारे॥
हाथ गदा त्रिशूल सुहावै।
भक्तन के सब संकट टर जावै॥
पिंगल, कृष्ण, रौद्र, यम नाम।
सौरि, शनैश्चर, मंद प्रणाम॥
सूर्य पुत्र तुम छाया नंदन।
नील वर्ण तुम जग में वंदन॥
तुम्हरे नाम अनेक बखाने।
देव मनुज सब शीश नवाने॥
जन्म समय रवि अंग विराजे।
छाया तनय नाम जग साजे॥
तुम्हरी दृष्टि जहाँ पड़ि जाई।
कर्मानुसार फल वहाँ आई॥
राजा हो या रंक संसारा।
कर्म बिना न छूटे कारा॥
देव दनुज नर सब डर पावें।
कर्मों का फल तुम दिखलावें॥
न्याय तुम्हारा अटल कहाया।
कर्मों का लेखा तुमने पाया॥
जो नर तुमको तेल चढ़ावै।
श्रद्धा सहित तुम्हें मनावै॥
तिल, उड़द और दीप जलावे।
भक्ति भाव से शीश नवावे॥
उसके कष्ट शनैः मिट जावें।
जीवन में सुख-शांति आवे॥
शनिवार को जो व्रत धारे।
शनि कृपा से संकट टारे॥
हनुमान जी के भक्त जो होते।
शनि भय से वे मुक्त ही होते॥
राम नाम जो नित ही गावे।
शनिदेव उस पर कृपा बरसावे॥
सच्चे मन से ध्यान लगाओ।
कर्म पथ पर आगे बढ़ जाओ॥
अन्याय अधर्म से दूर रहो।
सत्य धर्म का पालन करो॥
दीन दुखी की सेवा करना।
जीवों पर करुणा तुम धरना॥
दान पुण्य जो जन करता है।
शनि कृपा से सुख भरता है॥
आलस लोभ मोह त्यागो।
सद्कर्मों का दीप जलाओ॥
शनि देव तुम न्यायकारी।
तुमसे बड़ी न शक्ति हमारी॥
संकट में जो तुम्हें पुकारे।
कृपा करो तुम उसके द्वारे॥
रोग शोक सब दूर भगाओ।
भक्तों के जीवन में सुख लाओ॥
धन वैभव और यश प्रदान करो।
मन में सद्बुद्धि का संचार करो॥
भक्त तुम्हारे चरणों आए।
तुम उनके सब कष्ट मिटाए॥
जो यह चालीसा नित गावे।
शनि कृपा का फल वह पावे॥
श्रद्धा भक्ति हृदय में धारे।
शनिदेव उसके काज सँवारे॥
जय जय जय शनिदेव दयाला।
कृपा करो हे सूर्यनंदन लाला॥
॥ समापन दोहा ॥
शनिदेव महाराज की, महिमा अपरंपार।
कर्मानुसार फल दीजिए, रखिए भक्तन की लाज॥
॥ श्री शनिदेव महाराज की जय ॥ 🙏🪔

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